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कृतज्ञता का स्वर- ‘नई गूँज’ के सारथियों के नाम एक पाती

आदरणीय रचनाकारों एवं सुधी साहित्यकारों,

साहित्य के इस पावन ‘तीर्थ’ में, जहाँ शब्द ब्रह्म हैं और भावनाएँ गंगा की निर्मल धारा, वहाँ आप सभी का सह-यात्री होना हमारे लिए किसी गौरव से कम नहीं है। आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो स्मृतियों के गलियारे में उन पहले कदमों की आहट सुनाई देती है, जिन्होंने साल 2022 में ‘नई गूँज’ की नींव रखी थी।

आप में से कुछ साथी उस पहले अंक से हमारे साथ हैं, जिन्होंने उस समय हम पर विश्वास जताया जब ‘नई गूँज’ महज एक स्वप्न थी। वहीं, कुछ साथी हर गुजरते अंक के साथ कदम-दर-कदम जुड़ते गए और देखते ही देखते यह छोटा सा सफर एक विशाल ‘कारवां’ में तब्दील हो गया। आज ‘नई गूँज’ केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि एक वैचारिक परिवार है।

शब्दों की शक्ति और सामाजिक सरोकार

आपकी लेखनी से निकली हर कहानी, हर कविता और हर आलेख ने समाज के मानस पटल पर एक अमिट छाप छोड़ी है। हमें यह कहते हुए गर्व होता है कि ‘नई गूँज’ के माध्यम से आप सभी सामाजिक सुधार का एक ऐसा महती प्रयास कर रहे हैं, जो कभी ‘विनम्र’ प्रार्थना सा प्रतीत होता है, तो कभी ‘क्रांतिकारी’ शंखनाद की तरह गूँजता है।

अक्सर कहा जाता है कि लेखक की आवाज़ कागज़ों पर लिखी होती है, लेकिन आपकी आवाज़ में वह खनक है जिसे सीमाओं के पार, बहुत दूर तक सुना जा सकता है। आपकी स्याही ने उन विषयों को छुआ है जो समाज के लिए दर्पण का काम करते हैं।

विविधता: भारत का प्रतिबिंब

हमारा भारत विविध संस्कृतियों, भाषाओं और परंपराओं का देश है। ‘नई गूँज’ का स्वरूप भी ठीक वैसा ही है। 2022 से प्रतिमाह पूरी तरह निःशुल्क और ऑनलाइन प्रकाशित होने वाली इस पत्रिका ने अपने हर अंक में विविधताओं को समेटा है। यहाँ एक ओर जहाँ गंभीर विमर्श हैं, वहीं दूसरी ओर कोमल भावनाएँ भी हैं।

यह आप सभी के निस्वार्थ और अमूल्य सहयोग का ही परिणाम है कि आज ‘नई गूँज’ की प्रशंसा केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं है। समुद्र पार बैठे विदेशी साहित्य प्रेमी भारतीयों ने भी इस प्रयास को सराहा है और इसे अपनी जड़ों से जुड़ने का एक सशक्त माध्यम माना है।

अमूल्य योगदान के लिए कोटि-कोटि धन्यवाद

साहित्य की सेवा का यह मार्ग कठिन होता है, किंतु आप जैसे समर्पित लेखकों की उपस्थिति इसे सुगम और आनंदमयी बना देती है। बिना किसी व्यावसायिक लोभ के, निःशुल्क भाव से उत्कृष्ट साहित्य का सृजन करना और उसे जन-जन तक पहुँचाना अपने आप में एक साधना है।

संपादकीय टीम के पास शब्द कम हैं, पर भावनाएँ अपार हैं। हम ‘नई गूँज’ के उन सभी स्तंभों (लेखकों) का हृदय की गहराइयों से आभार व्यक्त करते हैं, जो हमारे साथ इस साहित्य-तीर्थ की परिक्रमा कर रहे हैं।

आपकी लेखनी अनवरत चलती रहे, आपकी आवाज़ और प्रखर हो, और ‘नई गूँज’ की यह प्रतिध्वनि युगों-युगों तक गूँजती रहे।

सादर वंदन और धन्यवाद,

समस्त संपादकीय टीम,

‘नई गूँज’ पत्रिका

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