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The voice of victory

संयम, साधक के जीवन में मकान के नींव की तरह है यदि मकान की नींव कमजोर रहती है तो वह मकान अधिक समय तक टिक नहीं सकता है उसी प्रकार साधक के जीवन में संयम अर्थात् आत्म संयम कमजोर हो जाए तो वह साधना के पथ अर्थात् अपने लक्ष्य से विमुख हो जाता है |

वर्तमान में देखा जाए तो साधारण व्यक्ति और साधक में अधिक फर्क दिखाई नहीं देता है इसका कारण है कि दोनों ने अपने जीवन में संयम को स्थान नहीं दिया है | जिस कारण चाहे साधक हो, चाहे साधारण व्यक्ति दोनों ही दु:खी, निराश दिखाई देते हैं | आज इस असंयम के कारण ही समाज में हिंसा, अपराध, रोग, शोक आदि दिखाई दे रहे हैं क्योंकि मन के वशीभूत होकर ही यह सब कुछ हो रहा है|

यदि साधक का नियंत्रण मन पर नहीं है तो वह बहुत शीघ्र ही इस मायावी, बनावटी, कल्पनाओं के आकर्षण से आकर्षित हो जाता है और अपने विवेक को त्याग कर स्वयं एक गहरी खाई में उतर जाता है, जिस कारण वह स्वयं को नागपास में जकड़ा हुआ महसूस करता है और अपना पतन स्वयं ही कर लेता है|

इस संसार में हर व्यक्ति के सामने प्रलोभन का मोहक रूप नाना प्रकार से सामने आता ही रहता है | जब यह सामने आता है तो इसकी चकाचौंध सबसे पहले मन को आकर्षित करती है , जिस कारण मन को उसमें संसार का सबसे अधिक सुख दिखाई देता है| उस क्षण विवेक भी पंगु हो जाता है और उसकी सारी नैतिकता, व्रत, संकल्प, क्षणभंगुर सुख के लिए घुटने टेक देते हैं और वह अपने लक्ष्य से स्वयं को बहुत दूर पाता है |

वर्तमान में सभी जगह इसी क्षणभंगुर सुख के लिए लोग अपने पतन करने के लिए लालायित है| इस मायावी आकर्षण ने बड़े-बड़े विद्वानों को भी धूल चटा दी है | जो साधना के पथ पर आगे बढ़ना चाहते थे वह भी विपरीत ही कार्यों में संलग्न है और अपना व समाज का नुकसान कर रहे हैं |

श्रीमद् भगवद् गीता में भी कृष्ण ने कहा है कि मन को संयमित न करने वाले पुरुष के लिए योग दुष्प्राप्य है | जिस व्यक्ति ने अपने मन पर विजय प्राप्त कर ली उसने दुर्लभ से दुर्लभ चीज को प्राप्त कर लिया है|

जो साधक या व्यक्ति इसकी चंचलता में बहक गया है उसने अपना चरित्र, आदर्श, नैतिक दृढ़ता, धर्म को नष्ट-भ्रष्ट कर दिया है| वह अपनी एक कुचेष्टाओ को छुपाने के लिए नयी -नयी कुचेष्टाएँ करता ही रहता है और पापरूपी खाई में गोते लगाता ही रहता है तथा अपना जीवन सांसारिक ताप संताप की अग्नि में झुलसाता रहता है | इस कारण वह इंद्रियों सुखों के लिए अपने जीवन की शांति को खो बैठता है और आध्यात्मिक सुख से भी वंचित हो जाता है|

अतः जो व्यक्ति इस संसार में साधक की तरह अपना जीवन जीना चाहता है तो उसे संयम का मार्ग अपनाना ही पड़ेगा | यह तभी संभव होगा जब व्यक्ति मन को एकाग्रचित कर ले | अन्यथा भटकने के सिवाय कुछ भी हाथ नहीं लगेगा और जीवन भी निरर्थक ही चला जाएगा |

साधना के इतिहास में ऐसे अनगिनत उदाहरण है जिन्होंने संयम को अपना करके स्थिर सुख को प्राप्त कर लिया है तथा इसके विपरीत आचरण करके अपनी और समाज की हानि ही की है |

संयम, साधक के जीवन में मकान के नींव की तरह है यदि मकान की नींव कमजोर रहती है तो वह मकान अधिक समय तक टिक नहीं सकता है उसी प्रकार साधक के जीवन में संयम अर्थात् आत्म संयम कमजोर हो जाए तो वह साधना के पथ अर्थात् अपने लक्ष्य से विमुख हो जाता है |

वर्तमान में देखा जाए तो साधारण व्यक्ति और साधक में अधिक फर्क दिखाई नहीं देता है इसका कारण है कि दोनों ने अपने जीवन में संयम को स्थान नहीं दिया है | जिस कारण चाहे साधक हो, चाहे साधारण व्यक्ति दोनों ही दु:खी, निराश दिखाई देते हैं | आज इस असंयम के कारण ही समाज में हिंसा, अपराध, रोग, शोक आदि दिखाई दे रहे हैं क्योंकि मन के वशीभूत होकर ही यह सब कुछ हो रहा है|

यदि साधक का नियंत्रण मन पर नहीं है तो वह बहुत शीघ्र ही इस मायावी, बनावटी, कल्पनाओं के आकर्षण से आकर्षित हो जाता है और अपने विवेक को त्याग कर स्वयं एक गहरी खाई में उतर जाता है, जिस कारण वह स्वयं को नागपास में जकड़ा हुआ महसूस करता है और अपना पतन स्वयं ही कर लेता है|

इस संसार में हर व्यक्ति के सामने प्रलोभन का मोहक रूप नाना प्रकार से सामने आता ही रहता है | जब यह सामने आता है तो इसकी चकाचौंध सबसे पहले मन को आकर्षित करती है , जिस कारण मन को उसमें संसार का सबसे अधिक सुख दिखाई देता है| उस क्षण विवेक भी पंगु हो जाता है और उसकी सारी नैतिकता, व्रत, संकल्प, क्षणभंगुर सुख के लिए घुटने टेक देते हैं और वह अपने लक्ष्य से स्वयं को बहुत दूर पाता है |

वर्तमान में सभी जगह इसी क्षणभंगुर सुख के लिए लोग अपने पतन करने के लिए लालायित है| इस मायावी आकर्षण ने बड़े-बड़े विद्वानों को भी धूल चटा दी है | जो साधना के पथ पर आगे बढ़ना चाहते थे वह भी विपरीत ही कार्यों में संलग्न है और अपना व समाज का नुकसान कर रहे हैं |

श्रीमद् भगवद् गीता में भी कृष्ण ने कहा है कि मन को संयमित न करने वाले पुरुष के लिए योग दुष्प्राप्य है | जिस व्यक्ति ने अपने मन पर विजय प्राप्त कर ली उसने दुर्लभ से दुर्लभ चीज को प्राप्त कर लिया है|

जो साधक या व्यक्ति इसकी चंचलता में बहक गया है उसने अपना चरित्र, आदर्श, नैतिक दृढ़ता, धर्म को नष्ट-भ्रष्ट कर दिया है| वह अपनी एक कुचेष्टाओ को छुपाने के लिए नयी -नयी कुचेष्टाएँ करता ही रहता है और पापरूपी खाई में गोते लगाता ही रहता है तथा अपना जीवन सांसारिक ताप संताप की अग्नि में झुलसाता रहता है | इस कारण वह इंद्रियों सुखों के लिए अपने जीवन की शांति को खो बैठता है और आध्यात्मिक सुख से भी वंचित हो जाता है|

अतः जो व्यक्ति इस संसार में साधक की तरह अपना जीवन जीना चाहता है तो उसे संयम का मार्ग अपनाना ही पड़ेगा | यह तभी संभव होगा जब व्यक्ति मन को एकाग्रचित कर ले | अन्यथा भटकने के सिवाय कुछ भी हाथ नहीं लगेगा और जीवन भी निरर्थक ही चला जाएगा |

साधना के इतिहास में ऐसे अनगिनत उदाहरण है जिन्होंने संयम को अपना करके स्थिर सुख को प्राप्त कर लिया है तथा इसके विपरीत आचरण करके अपनी और समाज की हानि ही की है |

फूलों का विचित्र संसार

 

माली आवत देखि के, कलियाँ करैं पुकार।

फूली-फूली चुनि गई, कालि हमारी बार॥

 

मृत्यु रूपी माली को आता देखकर अल्पवय जीव कहता है कि जो पुष्पित थे अर्थात् पूर्ण विकसित हो चुके थे, उन्हें काल चुन ले गया। कल हमारी भी बारी आ जाएगी। अन्य पुष्पों की तरह मुझे भी काल कवलित होना पड़ेगा।

 कबीर

फूल से पूछता अगर कोई।

तो बिहँस वह यही बात पाता।

काम के हैं महल न सोने के।

हैं हमें मन हरा भरा भाता।

खिलते ही कितनी देर के लिये हैं  फूल ?

इतना क्षणिक जीवन और इतना उत्साह ,

क्या अद्भुत है ,  प्रभु की ये सुन्दर रचना  |

उसे फिक्र नहीं जीवन की क्षणिकता की, वो तोड़ा जाता है, वो मुरझा जाता है, वो सूख जाता है , वो पाँव तले मसला जाता है लेकिन ये सब झेलने से एक क्षण पूर्व भी मुस्कराहट ही देता रहता है |

वो भी सबको, हर किसी को, कोई भेद भाव नहीं, सबके लिये समान |

ना वो अपनी खूबसूरती पर अभिमान करता है, ना छोटे से जीवन का अवसाद |

वो हर हाल में फूल है

किसी कवि ने कहा है

जिसकी रचना इतनी सुन्दर

वो कितना सुन्दर होगा ?

सच में जिस परम पिता ईश्वर ने इस सुन्दर कृति को बनाया वो कितना सुन्दर होगा |

कभी प्रकृति के समीप जाकर अकेले बैठ कर देखिये आपको ऐसा लगेगा जैसे कुछ देर आपको ईश्वर की गोद में बैठने को मिल गया हो ?

बहुत रंग बहुत रूप होते हैं फूलो के, लेकिन फितरत एक जैसी, खुशबू बिखेर देना चारों ओर ,और खुद मिट जाना

कभी हमें क्लास रुम के बाहर मिलने वाली सीख भी तो लेनी चाहिए |  वो किताब भी तो पढनी चाहिये जो खुद भगवान ने लिखी है | , क्या उस शिक्षा पर भरोसा नहीं तम्हें ?

फिर मंदिर क्यों जाते हो ?

फूलों को लेने की परवाह नहीं,  उन्हें तो अपनी खुशबू को चारों तरफ बिखेर देना होता है और फिर खुद को ……………..

वो फिर भी खुशी देना नहीं रोकते नहीं और

हम हर समय व्यापार ही करते रहते हैं, कोई हमें दुखी करे तो हम उस से ज्यादा देकर ही संतुष्टि पाते हैं |

फूल ये तो नहीं सिखाते |

ईश्वर और उनकी रचनाएं कभी स्वार्थी नहीं होते, वे ये नहीं देखते कि उन्हें मिला क्या है,  वे केवल ये देखते हैं कि उन्हें

क्या देना है ?

जैसे प्रकृति , वो कुछ मांगती नहीं |

फूलों की तरह बनो वही ईश्वर की पूजा है, ना कि ईश्वर के आगे अगरबत्ती करने से  तुम आस्तिक बन जाओगे ।

लाल, पीला, हरा, गुलाबी ••••कितने रंग बिरंगे फूल

हम ने काँटों को भी नरमी से छुआ है

अक्सर

लोग बेदर्द हैं फूलों को मसल देते हैं

फूल हमेशा मुस्कुराता रहता है। काव्य में यह कह गया है कि बगिया के फूलों को देखो, कैसे खुश-खुश रहते हैं। आंधी हो, पानी हो चाहे, सबको हँस-हँस सहते हैं। प्रकृति के गोद में ही सब जन्म लेते हैं। इसी में सब फलते-फूलते हैं अथवा अंत में इसी में समा जाते हैं। प्रकृति सदैव ही किसी ना किसी रूप में हमें कुछ देती ही रहती है। फूल हर स्थिति में अपने आसपास प्रसन्नता का ही माहौल बनाए रखता है। इससे  पता चलता है कि प्रकृति हमारे लिए कितनी महत्वपूर्ण है।

एक फूल जो अपना पूरा जीवन दुसरो की ख़ुशी के लिए न्योछावर कर देता हे वैसे ही हमें भी अपनी ज़िन्दगी दुसरो के ख़ुशी के लिए जीना चाहिए अगर आप किसी का भला न करे तो कोई बात नहीं लेकिन आपकी वजह से किसी की बुरा तो नहीं होना चाहिए।

एक कमल का फूल हमें ये सीखाता है  कि हमारे आसपास चाहे कितनी ही गंदगी क्यों हो , हमारे आसपास चाहे कितनी ही बुराई क्यों न हो लेकिन उनमें हमारी अच्छाई अपनी जगह तलाश कर ही लेती हैं

फूल के अंदर सबको खुश्बू देने की एक अच्छी आदत होती हे और उसी अच्छी आदत से लोग फूल को अपने पास रखते हे फूल के प्रति आकर्षित होते हैं  , वैसे ही इंसान के अंदर भी एक अच्छी आदत होनी चाहिए , जिसे लोग उसे पसंद करे।

एक फूल को ये पता हे की अगर में खिलूँगा तो लोग मुझे तोड़ देंगे लेकिन फिर भी वह खिलता हे और खुश्बू देता हे और दुसरो के लिए काम आता है,  वैसे ही हमें भी अपने भविष्य के बारे में चिंता नहीं करनी चाहिए । जो जन्म लेता है , उसे एक दिन मरना ही है, बस हमें अपनी ज़िन्दगी फूल की तरह मुस्कुराते हुए जीना है  और अपनी अच्छी आदतों से दुसरो का भला करना है  । गुलाब का फूल , हमेंशा काँटों के बीच रहता हे लेकिन कभी भी वो काँटों की तरह दूसरो को चुभता नहीं और उनको नुकसान नहीं पहुँचाता |

इसी प्रकार हम भी भले ही बुरे लोगो के पास रहे,   लेकिन हमें उनकी बुरी आदते ,  अपनी ज़िन्दगी में नहीं लानी चाहिए। यानि कि कोई भी इंसान बुरे से बुरे लोगो के साथ रहकर भी गुलाब की तरह एक अच्छा इंसान बन सकता है ।

एक फूल दुसरो को खुश्बू देने के लिए , दूसरों के लिए टूटना पसंद करता हे लेकिन कभी भी खुश्बू देना नहीं छोड़ता वैसे ही हमें भी अपनी ज़िन्दगी में चाहे कोई हमारा गलत इस्तेमाल ही क्यों न करे लेकिन फिर भी हमें अपने अच्छे कर्म को नहीं छोड़ना चाहिए ।

फूल हमें  अच्छाई पर चलना , बुराई से प्रभावित हुए बिना सिखाते हैं ।

एक फूल अपनी सुगंध को चारो दिशा में फैलता हे वैसे ही हमें भी अपने अच्छे कर्मो को चारे और फैलाना चाहिए क्योकि हमारा कर्म ही हमारी पहचान है ।

एक फूल हमेंशा मुस्कुराता हुआ , खिलखिलाता हुआ अपनी खुशबु बिखरता है वैसे ही ,  हमें भी फूल की तरह सदैव मुस्कुराते हुए रहना है और दूसरे के  प्रति अपने कर्म करते रहता है।

गुलाब हमेंशा काँटों के बीच  ही पैदा होता है,  ऐसे ही आप भी किसी परिस्थिति में क्यों न हो आप भी अपनी अलग पहचान बना सकते हैं बिलकुल गुलाब की तरह यानि कि गुलाब का फूल ,  हमें ये सीखाता हे की हमें मुश्किलों के बीच राह कर भी किस तरह आगे बढकर दूसरो के जीवन में खुशियों बिखराकर अपने कर्तव्य के पथ पर आगे बढ़ना है ।

रोज के सैकड़ों बखेड़ों में।

वे न जायें बुरी तरह फाँसे।

है खिलाती खुली हवा उनको।

फूल हैं ओस बूँद के प्यासे।

 

 

 

 

 

 

 

माली आवत देखि के, कलियाँ करैं पुकार।

फूली-फूली चुनि गई, कालि हमारी बार॥

मृत्यु रूपी माली को आता देखकर अल्पवय जीव कहता है कि जो पुष्पित थे अर्थात् पूर्ण विकसित हो चुके थे, उन्हें काल चुन ले गया। कल हमारी भी बारी आ जाएगी। अन्य पुष्पों की तरह मुझे भी काल कवलित होना पड़ेगा।

कबीर

फूल से पूछता अगर कोई।

तो बिहँस वह यही बात पाता।

काम के हैं महल न सोने के।

हैं हमें मन हरा भरा भाता।

खिलते ही कितनी देर के लिये हैं  फूल ?

इतना क्षणिक जीवन और इतना उत्साह ,

क्या अद्भुत है ,  प्रभु की ये सुन्दर रचना  |

उसे फिक्र नहीं जीवन की क्षणिकता की, वो तोड़ा जाता है, वो मुरझा जाता है, वो सूख जाता है , वो पाँव तले मसला जाता है लेकिन ये सब झेलने से एक क्षण पूर्व भी मुस्कराहट ही देता रहता है |

वो भी सबको, हर किसी को, कोई भेद भाव नहीं, सबके लिये समान |

ना वो अपनी खूबसूरती पर अभिमान करता है, ना छोटे से जीवन का अवसाद |

वो हर हाल में फूल है

किसी कवि ने कहा है

जिसकी रचना इतनी सुन्दर

वो कितना सुन्दर होगा ?

सच में जिस परम पिता ईश्वर ने इस सुन्दर कृति को बनाया वो कितना सुन्दर होगा |

कभी प्रकृति के समीप जाकर अकेले बैठ कर देखिये आपको ऐसा लगेगा जैसे कुछ देर आपको ईश्वर की गोद में बैठने को मिल गया हो ?

बहुत रंग बहुत रूप होते हैं फूलो के, लेकिन फितरत एक जैसी, खुशबू बिखेर देना चारों ओर ,और खुद मिट जाना

कभी हमें क्लास रुम के बाहर मिलने वाली सीख भी तो लेनी चाहिए |  वो किताब भी तो पढनी चाहिये जो खुद भगवान ने लिखी है | , क्या उस शिक्षा पर भरोसा नहीं तम्हें ?

फिर मंदिर क्यों जाते हो ?

फूलों को लेने की परवाह नहीं,  उन्हें तो अपनी खुशबू को चारों तरफ बिखेर देना होता है और फिर खुद को ……………..

वो फिर भी खुशी देना नहीं रोकते नहीं और

हम हर समय व्यापार ही करते रहते हैं, कोई हमें दुखी करे तो हम उस से ज्यादा देकर ही संतुष्टि पाते हैं |

फूल ये तो नहीं सिखाते |

ईश्वर और उनकी रचनाएं कभी स्वार्थी नहीं होते, वे ये नहीं देखते कि उन्हें मिला क्या है,  वे केवल ये देखते हैं कि उन्हें

क्या देना है ?

जैसे प्रकृति , वो कुछ मांगती नहीं |

फूलों की तरह बनो वही ईश्वर की पूजा है, ना कि ईश्वर के आगे अगरबत्ती करने से  तुम आस्तिक बन जाओगे ।

लाल, पीला, हरा, गुलाबी ••••कितने रंग बिरंगे फूल

हम ने काँटों को भी नरमी से छुआ है

अक्सर

लोग बेदर्द हैं फूलों को मसल देते हैं

फूल हमेशा मुस्कुराता रहता है। काव्य में यह कह गया है कि बगिया के फूलों को देखो, कैसे खुश-खुश रहते हैं। आंधी हो, पानी हो चाहे, सबको हँस-हँस सहते हैं। प्रकृति के गोद में ही सब जन्म लेते हैं। इसी में सब फलते-फूलते हैं अथवा अंत में इसी में समा जाते हैं। प्रकृति सदैव ही किसी ना किसी रूप में हमें कुछ देती ही रहती है। फूल हर स्थिति में अपने आसपास प्रसन्नता का ही माहौल बनाए रखता है। इससे  पता चलता है कि प्रकृति हमारे लिए कितनी महत्वपूर्ण है।

एक फूल जो अपना पूरा जीवन दुसरो की ख़ुशी के लिए न्योछावर कर देता हे वैसे ही हमें भी अपनी ज़िन्दगी दुसरो के ख़ुशी के लिए जीना चाहिए अगर आप किसी का भला न करे तो कोई बात नहीं लेकिन आपकी वजह से किसी की बुरा तो नहीं होना चाहिए।

एक कमल का फूल हमें ये सीखाता है  कि हमारे आसपास चाहे कितनी ही गंदगी क्यों हो , हमारे आसपास चाहे कितनी ही बुराई क्यों न हो लेकिन उनमें हमारी अच्छाई अपनी जगह तलाश कर ही लेती हैं

फूल के अंदर सबको खुश्बू देने की एक अच्छी आदत होती हे और उसी अच्छी आदत से लोग फूल को अपने पास रखते हे फूल के प्रति आकर्षित होते हैं  , वैसे ही इंसान के अंदर भी एक अच्छी आदत होनी चाहिए , जिसे लोग उसे पसंद करे।

एक फूल को ये पता हे की अगर में खिलूँगा तो लोग मुझे तोड़ देंगे लेकिन फिर भी वह खिलता हे और खुश्बू देता हे और दुसरो के लिए काम आता है,  वैसे ही हमें भी अपने भविष्य के बारे में चिंता नहीं करनी चाहिए । जो जन्म लेता है , उसे एक दिन मरना ही है, बस हमें अपनी ज़िन्दगी फूल की तरह मुस्कुराते हुए जीना है  और अपनी अच्छी आदतों से दुसरो का भला करना है  । गुलाब का फूल , हमेंशा काँटों के बीच रहता हे लेकिन कभी भी वो काँटों की तरह दूसरो को चुभता नहीं और उनको नुकसान नहीं पहुँचाता |

इसी प्रकार हम भी भले ही बुरे लोगो के पास रहे,   लेकिन हमें उनकी बुरी आदते ,  अपनी ज़िन्दगी में नहीं लानी चाहिए। यानि कि कोई भी इंसान बुरे से बुरे लोगो के साथ रहकर भी गुलाब की तरह एक अच्छा इंसान बन सकता है ।

एक फूल दुसरो को खुश्बू देने के लिए , दूसरों के लिए टूटना पसंद करता हे लेकिन कभी भी खुश्बू देना नहीं छोड़ता वैसे ही हमें भी अपनी ज़िन्दगी में चाहे कोई हमारा गलत इस्तेमाल ही क्यों न करे लेकिन फिर भी हमें अपने अच्छे कर्म को नहीं छोड़ना चाहिए ।

फूल हमें  अच्छाई पर चलना , बुराई से प्रभावित हुए बिना सिखाते हैं ।

एक फूल अपनी सुगंध को चारो दिशा में फैलता हे वैसे ही हमें भी अपने अच्छे कर्मो को चारे और फैलाना चाहिए क्योकि हमारा कर्म ही हमारी पहचान है ।

एक फूल हमेंशा मुस्कुराता हुआ , खिलखिलाता हुआ अपनी खुशबु बिखरता है वैसे ही ,  हमें भी फूल की तरह सदैव मुस्कुराते हुए रहना है और दूसरे के  प्रति अपने कर्म करते रहता है।

गुलाब हमेंशा काँटों के बीच  ही पैदा होता है,  ऐसे ही आप भी किसी परिस्थिति में क्यों न हो आप भी अपनी अलग पहचान बना सकते हैं बिलकुल गुलाब की तरह यानि कि गुलाब का फूल ,  हमें ये सीखाता हे की हमें मुश्किलों के बीच राह कर भी किस तरह आगे बढकर दूसरो के जीवन में खुशियों बिखराकर अपने कर्तव्य के पथ पर आगे बढ़ना है ।

रोज के सैकड़ों बखेड़ों में।

वे न जायें बुरी तरह फाँसे।

है खिलाती खुली हवा उनको।

फूल हैं ओस बूँद के प्यासे।

 

 

 

 

 

 

 

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बृजेश कुमार


असफलता ही सफलता की सीढ़ी है |

प्रत्येक मनुष्य के जीवन में असफलता तथा निराशा का आना, उसे कमजोर करना नहीं अपितु पुन: अपना स्व मूल्यांकन करके फिर से आगे बढ़ना होता है |

 हर व्यक्ति के जीवन में सफलता और असफलता, सुख और दु:ख आते ही रहते हैं जो मनुष्य दु:ख और असफलताओं से घबराते नहीं हैं अपितु अपनी कमियों को पहचान कर प्रयत्नशील बने रहते हैं वह अपने जीवन में सफलता की ऊंचाइयों को छूते है |

 ऐसा कभी आपने देखा है कि कभी रात के बाद दिन नहीं हुआ हो, क्या पतझड़ के बाद बसंत नहीं आती है, क्या ग्रीष्म के बाद वर्षा नहीं आती है फिर हम अपनी कठिनाइयों को स्थाई क्यू समझ लेते हैं| जब एक के बाद एक का आना निश्चित है तो यह भी निश्चित है कि सुख के बाद दु:ख अवश्य होगा | जहां जन्म है वहाँ मरण होगा |जहाँ सफलता है वहां असफलता भी होगी |

 यदि मनुष्य दु:खों और निराशा को जकड़ कर बैठ जायेगा तो वह अपने अंदर शोक, विपत्ति, जलन, रोग तथा अल्पायु को जन्म दे रहा होगा|

 अगर सही मायने में कहा जाये तो दु:खों का मूल कारण निराशा नहीं है अपितु निराशा के कारण ही दु:खो का जन्म हो रहा है|

 अगर हमें कभी असफलता तथा निराशा का सामना भी करना पड़े तो हमें घबराने की बजाये उसका उपचार अर्थात उसके कारण का उपचार करना चाहिए और जिसने निराशा को खुशी-खुशी स्वीकार किया और अपने लक्ष्य के प्रति प्रयत्नशील  रहा तो यह निराशा ही एक दिन उसके लिए आशा की किरण अर्थात उसके गले का हार बन जाएगी |

मनोबल बनाए रखना एक महत्वपूर्ण गुण है जो हमें जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की ओर बढ़ने में मदद करता है। मनोबल से तात्पर्य मानसिक शक्ति और ऊर्जा से है, जो हमें जीवन की चुनौतियों और संघर्षों का सामना करने में साहस और आत्म-संयम प्रदान करता है।

मनोबल का महत्व सबसे पहले हमारे स्वास्थ्य में दिखाई देता है। स्वस्थ मानसिकता रखने से हमारा शारीरिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है। यह हमें अवसाद, तनाव, और दिल की बीमारियों से दूर रखता है। मनोबल से उम्मीद से भरा दिल और आत्म-निर्भरता मिलती है, जिससे हम अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में समर्थ होते हैं। मनोबल का संवाद भी हमारे रिश्तों में गहराई और महत्वपूर्णता बनाए रखता है। जब हम प्रसन्न और संतुलित रहते हैं, तो हमारे संबंध भी स्थिर और समरस रहते हैं। मनोबल बनाए रखने से हम आत्म-समर्पण में जीवन जीने की क्षमता प्राप्त करते हैं। हमारा निरंतर आत्म-मनोबल एक अद्वितीय शक्ति है जो हमें जीवन की कठिनाइयों का सामना करने में समर्थ बनाती है। मनोबल का सही तरीके से देखभाल करने के लिए आत्म-समर्पण, सकारात्मकता, और साहस की आवश्यकता होती है। सकारात्मक मानसिकता रखने से हम अपने अतीत को स्वीकार करते हैं और भविष्य के लिए नई ऊर्जा और उत्साह प्राप्त करते हैं। मनोबल बनाए रखना हमें जीवन की हर मुश्किल से निपटने की क्षमता प्रदान करता है। यह हमें आत्म-संवाद, संतुलन, और संघर्ष में मदद करता है, जिससे हम अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में समर्थ होते हैं और खुशहाल जीवन जी सकते हैं।

मनोबल की शक्ति से हम कई महत्वपूर्ण कार्यों को संपन्न कर सकते हैं:

लक्ष्य प्राप्ति: मनोबल की शक्ति से हम अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में समर्थ होते हैं। यह हमें उत्साह, संघर्षशीलता, और समर्पण प्रदान करती है, जो हमें अपने मानसिक और शारीरिक सीमाओं को पार करने में साहस देती है।

स्वास्थ्य और खुशहाली: मनोबल की शक्ति से हम अपने मानसिक स्वास्थ्य को संजीवनी दे सकते हैं। सकारात्मक मानसिकता, संतुलन और आत्म-संयम के माध्यम से हम तनाव से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं।

संबंधों की सुधार: मनोबल की शक्ति से हम अपने संबंधों को मजबूती से निभा सकते हैं। सही दिशा में सकारात्मक ऊर्जा से हम अपने पारिवारिक और सामाजिक संबंधों को बनाए रख सकते हैं।

नई कौशल सीखना: मनोबल की शक्ति से हम नई चीजें सीखने की क्षमता प्राप्त कर सकते हैं। यह हमें नए विचार और नए कौशल विकसित करने में मदद करती है, जिससे हम अपने रोजगार में और भी महिमामयी बन सकते हैं।

सामाजिक परिवर्तन: मनोबल की शक्ति से हम सामाजिक परिवर्तन में योगदान कर सकते हैं। सकारात्मक मानसिकता से भरे लोग सामाजिक समस्याओं का सामना करने के लिए प्रेरित होते हैं और समाज में सुधार की दिशा में कदम उठाते हैं।

संघर्षों का सामना: मनोबल से सजीव और निष्ठावान मानसिकता प्राप्त कर हम जीवन की हर चुनौती और संघर्ष का सामना कर सकते हैं। यह हमें हालातों के खिलाफ उत्साही, संघर्षशील रहने में मदद करती है।

मनोबल की शक्ति हमें जीवन की हर क्षेत्र में सफलता की ओर ले जाने में मदद करती है, चाहे वह व्यक्तिगत जीवन हो, पेशेवर जीवन हो, या सामाजिक क्षेत्र में हो। यह हमें आत्म-संवाद और निर्भीक दृष्टिकोन प्रदान करती है, जो हमें जीवन की हर चुनौती का सामना करने में समर्थ बनाती है।