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“वृद्धजन और एकाकीपन: अस्थिर समाज में परिवार की भूमिका”

वृद्धाश्रम हमारे समाज में एक अनिवार्य संरचना के रूप में उभर रहे हैं, खासकर तब जब परिवार के ढाँचे विफल हो जाते हैं ।

बच्चे जब अपने माता-पिता की देखभाल  करने में असमर्थ हो जाते हैं। इस स्थिति में, वृद्धाश्रम एक विकल्प के रूप में सामने आता है, जहां वृद्धजन अपने जीवन के अंतिम वर्षों में एक सुरक्षित और संरक्षित वातावरण में रह सकते हैं। लेकिन इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि वृद्धाश्रम बुजुर्गों की समस्या का अंतिम समाधान नहीं हो सकता। इसका उपयोग केवल और केवल तब किया जाना चाहिए, जब परिवार के किसी भी कारण से वृद्धजनों की देखभाल सम्भव नहीं हो पा रही हो  ।

वृद्धश्रमों के विकल्प के रूप में परिवार और समाज को मिलकर काम करना होगा। परिवार की ज़िम्मेदारी केवल वृद्धजनों की भौतिक आवश्यकताओं को पूरा करने की सीमा तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें वृद्धजनों के मानसिक और वैज्ञानिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना होगा। इसके लिए समाज और परिवार वालों को ऐसे ही उपाय तैयार करने चाहिए, जहां वृद्धजन अपने घर के अंदर ही सुरक्षित, प्रतिष्ठितऔरसम्मानित जीवन जी सकते हैं ।

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